सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। सुधांशु की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उससे हादसे से पहले चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्य को लेकर पूछताछ कर रही है।
सत्य निकेतन के पीजी ऑपरेटर सुधांशु गिरफ्तार
सत्य निकेतन में पीजी ऑपरेटर सुधांशु को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, सुधांशु सत्य निकेतन की उस पीजी बिल्डिंग के संचालन से जुड़ा था, जो हादसे में ढह गई। वह ‘Hostel Daze’ चेन से जुड़ा बताया जा रहा है। इस चेन की इलाके में कई पीजी और हॉस्टल सुविधाएं संचालित होती हैं।
सुधांशु की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत में चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्य की जानकारी उसे कितनी थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन कामों के लिए किसकी अनुमति ली गई थी और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
हादसे में गई थी 7 लोगों की जान
सत्य निकेतन में पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारत अचानक ढह गई थी। हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक राहत और बचाव अभियान चलाया गया। इस दौरान मलबे से लोगों को निकालने का काम जारी रहा। हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
इमारत में कुल आठ कमरे और 16 बेड थे। पुलिस को आशंका है कि हादसे के समय वहां करीब सात से आठ छात्र मौजूद रहे होंगे। कई छात्र रक्षाबंधन की छुट्टियों के चलते बाहर गए हुए थे।

बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम
जांच में इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर में चल रहे मरम्मत कार्य पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे से पहले बेसमेंट में करीब 10 दिनों से काम चल रहा था। पुलिस अब इस काम से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि मरम्मत या निर्माण के दौरान इमारत की संरचना पर अतिरिक्त दबाव तो नहीं पड़ा। FIR में इमारत में अतिरिक्त मंजिलें बनाए जाने और कमजोर संरचना से जुड़े पहलुओं की भी जांच का जिक्र सामने आया है।
अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी
सुधांशु की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले इमारत के मालिक और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की है। एक लेबर ठेकेदार को भी गिरफ्तार किया गया है, जिस पर मरम्मत और निर्माण कार्य से जुड़े होने का आरोप है।
पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग तरीके से जांच रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि इमारत की सुरक्षा को लेकर किस स्तर पर लापरवाही हुई और मरम्मत कार्य किसकी जानकारी या अनुमति से कराया जा रहा था।
पांच MCD अधिकारी पहले ही सस्पेंड
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम के पांच अधिकारियों को भी निलंबित किया जा चुका है। अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत की गई है।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सवाल यह है कि पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारत की स्थिति और वहां चल रहे निर्माण कार्य की निगरानी पहले क्यों नहीं हुई।
जर्जर इमारतों पर भी एक्शन
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने जर्जर इमारतों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन की ओर से ऐसी इमारतों की पहचान और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हादसे के बाद क्षतिग्रस्त इमारत को गिराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
वहीं, पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के बाद देशभर में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग तेज हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर मामले पर सुनवाई करने की बात कही है।
फिलहाल सुधांशु से पुलिस पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किसकी क्या जिम्मेदारी थी और इमारत में किए गए निर्माण या मरम्मत कार्य का उसकी संरचनात्मक मजबूती पर कितना असर पड़ा।
Written by Ambar Pandey

