दो महीने में ही दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर पड़े गड्ढे, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल। पहली बारिश में ही सामने आई सड़क की खामियां
दो महीने में ही दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर पड़े गड्ढे, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल। देश की प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक बार फिर से चर्चा में है। लगभग 12,000 करोड़ की लागत से तैयार किया यह एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा पहली बारिश में ही जमीन में धँस गया और गढ्ढे दिखाई देने लगे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सड़क की सतह कई जगह से उखड़ी हुई दिखाई दे रही है। जिससे वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता
सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर गहरे गड्ढे और साफ़ रूप से दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कई लोगों का कहना है कि जिस सड़क को आधुनिक और विश्वस्तरीय बताया गया था, वह कुछ ही महीनों में खराब होने लगी है।
करोड़ों की लागत वाली परियोजना पर सवाल
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में गिना जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को काफी कम करना और यातायात को अधिक सुगम बनाना था। लेकिन सड़क की वर्तमान स्थिति को देखकर आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लागत से बनी परियोजना में इतनी जल्दी खामियां कैसे सामने आ गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सड़क का शुरुआती वर्षों में मजबूत और टिकाऊ बने रहना अपेक्षित होता है। यदि निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क क्षतिग्रस्त होने लगे तो इसकी जांच आवश्यक हो जाती है।
हादसों का बढ़ सकता है खतरा
सड़क पर बने बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। विशेष रूप से तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए ऐसे गड्ढे दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बारिश के दौरान जब गड्ढों में पानी भर जाता है तो उनकी गहराई का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों को जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करना चाहिए ताकि ,समय रहते किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।
निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने निर्माण कार्य की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो जिम्मेदार एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सार्वजनिक धन से बनने वाली बड़ी परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी है कि सड़क को नुकसान किस कारण से हुआ। यदि समस्या सामान बनाने तकनीकी खामियों या जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी है तो उसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
अधिकारियों की जवाबदेही का इंतजार
मामले के सामने आने के बाद लोगों की नजर अब उन सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और जांच के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए उचित उपाय लागू किए जाएं।
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को क्षेत्रीय विकास और बेहतर परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हालांकि, निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क पर गड्ढों का दिखाई देना चिंता का विषय है। वायरल वीडियो ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जरूरी है कि संबंधित एजेंसियां मामले की निष्पक्ष जांच करें, खामियों को दूर करें और यह सुनिश्चित करें कि जनता को सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़क सुविधा उपलब्ध हो सके।

