सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड टेंडर केस में मिली जमानत, 2 लाख के बॉन्ड पर कोर्ट का फैसला। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें जमानत दे दी। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP के टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को 2 लाख रुपये के निजी बॉन्ड और दो जमानतदारों की शर्त पर जमानत दी है। हालांकि, इस मामले में अदालत का विस्तृत आदेश अभी सामने नहीं आया है।
सत्येंद्र जैन के बेल से AAP नेता को बड़ी राहत
सत्येंद्र जैन को दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच यानी ACB ने 18 अगस्त को गिरफ्तार किया था। उनके साथ दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत पांच अन्य लोगों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। 19 अगस्त को कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अब 3 सितंबर को कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर दी है।
सत्येंद्र जैन पर क्या आरोप हैं?
सत्येंद्र जैन पर ACB के मुताबिक, जांच में टेंडर से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की गई। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कुछ टेंडर शर्तों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान आधिकारिक प्रक्रिया से पहले ही संबंधित लोगों के बीच हुआ था। जांच एजेंसी ने इसे टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित कोशिश बताया है। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और मामले में अदालत का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
क्या है दिल्ली जल बोर्ड टेंडर स्कैम?
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने और उनके अपग्रेडेशन के लिए जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। ACB का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में ऐसी तकनीकी शर्तें रखी गईं, जिनसे एक खास निजी कंपनी को फायदा पहुंच सकता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और निजी कंपनी को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि STP से जुड़ी प्रस्तावित पायलट स्टडी को पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा, टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव किए गए। ACB का दावा है कि इससे सरकारी खजाने पर वित्तीय असर पड़ा।

कोर्ट में जमानत को लेकर क्या दलील दी गई?
सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने दलील दी थी कि FIR दर्ज होने के काफी समय बाद उनकी गिरफ्तारी की गई। बचाव पक्ष ने कहा कि जैन जांच में सहयोग करते रहे हैं और उनकी हिरासत की जरूरत नहीं है।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि मामला नीतिगत फैसलों से जुड़ा है और जैन के भागने का कोई खतरा नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, ACB ने जमानत का विरोध किया था। जांच एजेंसी ने कहा था कि जांच अभी जारी है और आरोपियों के खिलाफ सबूत मौजूद हैं।
इस मामले में छह लोग गिरफ्तार हुए थे
ACB ने इस मामले में सत्येंद्र जैन समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय, पूर्व contractual consultant अंकित श्रीवास्तव, AN Enterprises के नागेंद्र यादव, Euroteck Environment Pvt. Ltd. के मालिक राजा कुमार कुर्रा और Srijanhar के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं। मामले में FIR 11 मई 2024 को दिल्ली सरकार के डायरेक्टरल ऑफ विजिलेंस की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और IPC की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।
जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं
सत्येंद्र जैन को इस मामले में जमानत मिली है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अब विस्तृत कोर्ट आदेश आने के बाद जमानत की शर्तों और अदालत के तर्क की तस्वीर और साफ होगी।
Written by Ambar Pandey

