लखनऊ: JPNIC विवाद: अखिलेश यादव का BJP पर हमला, बोले- ‘बस चले तो अपनी पार्टी भी बेच दें।’जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी हाथों में सौंपने के फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर बीजेपी और योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी का बस चले तो वह अपनी पार्टी भी बेच दे।
अखिलेश यादव ने कहा कि JPNIC का निर्माण जनता की सुविधा और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया था। उनके मुताबिक, अब सवाल यह है कि जनता के पैसे से बनी इस इमारत को निजी हाथों में देने की जरूरत क्यों पड़ी।
JPNIC विवाद का पूरा ममला क्या है?
JPNIC लखनऊ में स्थित एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान तैयार की गई थी। अखिलेश यादव इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर देखते रहे हैं।
अब यूपी सरकार ने JPNIC के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्था को देने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य लंबे समय से अधूरे पड़े इस परिसर को बेहतर तरीके से विकसित करना है।
अखिलेश यादव ने BJP पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने JPNIC को अपने नाम से जोड़कर बेच दिया। उन्होंने तंज किया कि अगर बीजेपी के लोगों का बस चले तो वे पूरी बीजेपी को ही बेच दें।
उन्होंने कहा कि JPNIC के निर्माण के पीछे उनका उद्देश्य ऐसी इमारत तैयार करना था, जो जयप्रकाश नारायण के विचारों और संपूर्ण क्रांति के संदेश को आगे बढ़ाए। उनके मुताबिक, जयप्रकाश नारायण ने युवाओं को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

JPNIC को निजी हाथों में देने पर क्यों नाराज हैं अखिलेश?
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब JPNIC जनता के पैसे से बनी है, तो इसे निजी हाथों में देने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जनता की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी सरकार पिछले 10 साल से JPNIC से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की बात करती रही है। अखिलेश ने सवाल किया कि अगर भ्रष्टाचार हुआ था तो इतने वर्षों में इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई।
JPNIC का जयप्रकाश नारायण से क्या संबंध है?
अखिलेश यादव ने कहा कि JPNIC का नाम लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण के पीछे जयप्रकाश नारायण के लोकतांत्रिक संघर्ष और संपूर्ण क्रांति की विरासत को सम्मान देने का विचार था।
अखिलेश ने यह भी दावा किया कि बीजेपी के गठन के समय उसके नेताओं ने जयप्रकाश नारायण की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि उस समय बीजेपी ने समाजवादी विचारधारा से जुड़े संदेश को भी सामने रखा था।
सरकार का क्या है पक्ष?
JPNIC को लेकर सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इमारत को बेचा नहीं जा रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसे 30 साल की लीज पर निजी समूह को संचालन और रखरखाव के लिए देने का फैसला किया है।
इस व्यवस्था में जमीन और पूरी संपत्ति का मालिकाना हक LDA के पास ही रहेगा। चयनित निजी समूह को JPNIC के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए निजी समूह की ओर से LDA को 831 करोड़ रुपये दिए जाने की बात सामने आई है।
सरकार ने JPNIC को लेकर क्या कहा?
सरकार का कहना है कि JPNIC लंबे समय से अधूरा और विवादों में रहा परिसर है। इसे सम्मेलन, संस्कृति और खेल गतिविधियों के लिए एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। सरकार के मुताबिक, परियोजना की शुरुआती लागत करीब 265 करोड़ रुपये थी, जो बाद में 800 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।
यही वजह है कि सरकार अब इसके संचालन और रखरखाव के लिए निजी भागीदारी का रास्ता अपना रही है।
JPNIC पर फिर आमने-सामने BJP और SP
JPNIC को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव नया नहीं है। यह परिसर पहले भी दोनों दलों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। अब निजी संचालन के फैसले के बाद अखिलेश यादव ने एक बार फिर सरकार को घेरा है।
वहीं, सरकार का तर्क है कि संपत्ति बेची नहीं जा रही है, बल्कि सीमित अवधि के लिए संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्था को दी जा रही है। JPNIC को निजी हाथों में सौंपने के फैसले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अखिलेश यादव इसे जनता की संपत्ति को निजी हाथों में देने का मामला बता रहे हैं। वहीं, सरकार इसे JPNIC के बेहतर संचालन और विकास की योजना बता रही है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि JPNIC की जमीन और संपत्ति का मालिकाना हक LDA के पास ही रहेगा। निजी संस्था को 30 साल के लिए संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जानी है।
Written by Ambar Pandey

