नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के साथ हुई। पहली बार सदन में इसके सभी छह अंतरों का गायन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई सांसद मौजूद रहे। इसके बाद वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। विपक्ष ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। वहीं, सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़कर देखा।
पहली बार लोकसभा में गाया गया पूरा वंदे मातरम्
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया। इसमें गीत के सभी छह अंतरे शामिल थे। इसके बाद, सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी। यह घटनाक्रम मानसून सत्र के आखिरी दिन हुआ। साथ ही, इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन के बाद विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि संसद में केवल वंदे मातरम् गाने के लिए इतनी प्राथमिकता क्यों दी जा रही है। वहीं, विपक्ष ने संसद में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जरूरत बताई।
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने संसद में पूरे वंदे मातरम् के गायन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वंदे मातरम् से जुड़ा कानून बनाया है, उन्हें भी इसका पूरा स्वरूप याद नहीं है। यादव के मुताबिक, पहले वंदे मातरम् का जितना हिस्सा गाया जाता था, वह सभी को आसानी से याद रहता था, लेकिन अब पूरे गीत को याद रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के ज्यादातर राष्ट्रगान करीब एक मिनट के होते हैं, जबकि विस्तारित वंदे मातरम् के गायन में अधिक समय लगता है। उनके अनुसार, लंबे समय तक सावधान की मुद्रा में खड़े रहना कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सांसदों और आम लोगों के बीच वंदे मातरम् की प्रतियां वितरित करनी चाहिए, ताकि लोग राष्ट्रगीत के पूरे स्वरूप को पढ़कर और अभ्यास करके याद कर सकें।

मनोज तिवारी ने विपक्ष पर साधा निशाना
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने संसद में पूरे वंदे मातरम् के गायन का समर्थन करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद में गाए गए पूरे राष्ट्रगीत की तस्वीरें और वीडियो देश के हर व्यक्ति के मोबाइल तक पहुंचने चाहिए। तिवारी ने आरोप लगाया कि एक समय वंदे मातरम् को केवल इसके शुरुआती अंतरे तक सीमित कर दिया गया था और इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अब पूरा राष्ट्रगीत संसद में सम्मान के साथ गाया जा रहा है। तिवारी के मुताबिक, जब सभी सांसद एक साथ वंदे मातरम् गाते हैं तो यह बेहद गौरवपूर्ण दृश्य होता है। उन्होंने राहुल गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि वह राष्ट्रगीत गा नहीं रहे थे, लेकिन खड़े जरूर थे और यह भी अच्छी बात है। मनोज तिवारी ने कहा कि संभव है कि राहुल गांधी को अभी पूरा वंदे मातरम् याद न हो, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भी यह याद हो जाएगा।
‘जिन्होंने कानून बनाया, उन्हें भी याद नहीं…’
इसी बीच विपक्ष की ओर से वंदे मातरम को लेकर यह सवाल भी उठाया गया कि जिस गीत के सम्मान और नियमों को लेकर चर्चा हो रही है, उसके इतिहास और कानूनी स्थिति को लेकर भी स्पष्टता जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वंदे मातरम् को लेकर मौजूदा नियम क्या हैं। हालांकि, सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़ रहा है।
वंदे मातरम् को लेकर क्या है इतिहास?
वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के समान सम्मान देने की बात स्वीकार की गई थी। हालांकि, वंदे मातरम् को राष्ट्रगान नहीं बल्कि राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।
छह अंतरों को लेकर क्यों है चर्चा?
वंदे मातरम् का मूल संस्करण छह अंतरों का है। लंबे समय से सार्वजनिक और आधिकारिक आयोजनों में इसके शुरुआती दो अंतरों का ही इस्तेमाल प्रमुख रूप से होता रहा है। इसी वजह से, लोकसभा में पूरे छह अंतरों का गायन चर्चा का विषय बन गया। सरकार की ओर से पूर्ण संस्करण को लेकर जोर दिया जा रहा है। वहीं, विपक्ष इसे लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहा है।
संसद में सियासी टकराव जारी
वंदे मातरम् के गायन के अलावा मानसून सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला। इसके अलावा, सदन में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। कुल मिलाकर, लोकसभा में पूरे वंदे मातरम् के गायन ने एक बार फिर राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
Written by Ambar Pandey

