बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक चर्चित पुलिस एनकाउंटर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक युवक पुलिसकर्मियों के सामने पिस्टल लहराते और उन्हें चुनौती देते हुए दिखाई देता है, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी उसे काबू में नहीं कर पाते। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाने के प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव की बताई जा रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव का रहने वाला भरत भूषण तिवारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है और सार्वजनिक रूप से फायरिंग कर रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और विशेष टीम मौके पर पहुंची।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस ने युवक को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती गई। इसी दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें युवक खुलेआम पिस्टल ताने पुलिसकर्मियों को धमकाता दिखाई दिया। वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली और मौके पर मौजूद जवानों की तैयारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय कार्रवाई
वायरल वीडियो सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। प्रारंभिक जांच में माना गया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी संवेदनशील स्थिति को संभालने में अपेक्षित सतर्कता और त्वरित कार्रवाई नहीं दिखा सके। इसके बाद शाहपुर के थाना प्रभारी राजेश कुमार मलाकार को निलंबित कर दिया गया। उनके अलावा एक सब-इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभागीय जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान किस स्तर पर चूक हुई।
बाद में हुआ एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार, बाद में स्थिति और गंभीर हो गई। आरोप है कि युवक ने पुलिस टीम पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। इस दौरान भरत भूषण तिवारी घायल हो गया। उसे पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी। मौके से एक पिस्टल, कारतूस और अन्य सामान बरामद किए जाने की भी बात कही गई है।
परिवार और ग्रामीणों के आरोप
मृतक के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि युवक ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसके खिलाफ घातक कार्रवाई की गई। घटना के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन भी हुए और बड़ी संख्या में लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियों का पता चल सके।
बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक दबाव
घटना के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर पुलिस अपने कदम को कानूनी और आवश्यक बता रही है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले समूह इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वायरल वीडियो ने इस विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
आगे क्या?
फिलहाल विभागीय जांच और एनकाउंटर की परिस्थितियों की समीक्षा जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं मृतक के परिवार और स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

