आज है दुर्लभ संयोग वाली सोमवती अमावस्या
हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष 15 जून को मनाई जा रही सोमवती अमावस्या कई मायनों में खास है, क्योंकि यह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की अंतिम तिथि भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि देशभर के मंदिरों और पवित्र नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष दिन
सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। विवाहित महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
पितरों की कृपा पाने का सुनहरा अवसर
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सोमवती अमावस्या पितरों को स्मरण करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान कर तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष शांत होता है तथा पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि पितरों की संतुष्टि से परिवार में सुख, शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए श्रद्धालु आज के दिन विशेष रूप से दान-पुण्य और पितृ कर्मों का पालन करते हैं।
स्नान-दान से बढ़ता है पुण्य, आज समाप्त हो रहा पुरुषोत्तम मास
सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धर्माचार्यों के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और दक्षिणा का दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार यह अमावस्या पुरुषोत्तम मास के समापन के साथ पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। मान्यता है कि आज के दिन किए गए शुभ कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और उसे भगवान विष्णु तथा भगवान शिव दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

