लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पास, तीखी बहस और हंगामे के बाद ध्वनि मत से मिली मंजूरी

लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पास, तीखी बहस और हंगामे के बाद ध्वनि मत से मिली मंजूरी

नई दिल्ली: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा से पारित हो गया। सदन में इस विधेयक पर कई घंटों तक चर्चा चली, जिसके दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जोरदार हंगामा भी देखने को मिला। अंततः स्पीकर ओम बिरला ने ध्वनि मत से विधेयक के पारित होने की घोषणा की। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

यह विधेयक ऐसे समय पारित हुआ है, जब देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार बहस चल रही है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का भरोसा मजबूत करना है, जबकि विपक्ष ने चर्चा के दौरान सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी के बयान पर सदन में बढ़ा विवाद

विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी को लेकर सदन का माहौल अचानक गरमा गया। उनके बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा चलता रहा, हालांकि बाद में चर्चा आगे बढ़ी और विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना

विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और छात्रों के भविष्य से जुड़े विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगा रहा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इस विधेयक पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन विपक्ष ने ऐसा नहीं किया।

जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने भाषण में ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो न केवल असंसदीय थी, बल्कि संसदीय गरिमा के भी अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति संसदीय परंपराओं से परिचित है, तो उसे सदन में शब्दों के चयन को लेकर अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।

‘देश के युवाओं को मूर्ख कहना दुर्भाग्यपूर्ण’

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनके प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या नेता प्रतिपक्ष संसदीय कार्यवाही की मर्यादाओं से पूरी तरह परिचित हैं।

21 जुलाई की घटना का भी किया जिक्र

जितेंद्र सिंह ने अपने भाषण के दौरान 21 जुलाई की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन नेता प्रतिपक्ष प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरने पर बैठे थे। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे उनकी इच्छा वहां बैठने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया, तो उन्होंने स्वयं हटाए जाने की बात कही।

‘गोली नहीं चली, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ’

चर्चा के दौरान उठे एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां केवल आँसू गैस के गोले छोड़े गए थे। मंत्री के अनुसार, जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल भी नहीं उठता।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के मामलों में किसी मंत्री के पास गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार नहीं होता। उनके मुताबिक, ऐसी कार्रवाई का अधिकार संबंधित मजिस्ट्रेट के पास होता है।

हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक

सदन में लगातार विरोध और बहस के बावजूद एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को अंततः ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक पारित होने की घोषणा के बाद स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

अब इस विधेयक पर संसद की आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसे कानून का स्वरूप कब मिलेगा। हालांकि, लोकसभा से पारित होने के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक पर सख्ती को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

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Written by Ambar Pandey

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