हरियाणा के गुरुग्राम में साइबर क्राइम यूनिट ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह निवेश के नाम पर लोगों को झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।
कैसे हुआ पूरे नेटवर्क का खुलासा?
पुलिस जांच के अनुसार, यह पूरा गिरोह दिल्ली से संचालित हो रहा था और सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निवेश योजनाओं का लालच देता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने एक व्यक्ति से करीब 2.53 करोड़ रुपये की ठगी की थी, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई शुरू की।
छापेमारी के दौरान पुलिस को 36 मोबाइल फोन, 53 एटीएम कार्ड, कई बैंक पासबुक, चेकबुक और अन्य डिजिटल उपकरण मिले, जो इस नेटवर्क की संगठित कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं।
15 राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, इस साइबर ठगी गिरोह का नेटवर्क सिर्फ एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के करीब 15 राज्यों में इसके पीड़ित सामने आए हैं। गिरोह टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग समूह बनाकर निवेश के नाम पर फर्जी योजनाएं चलाता था।
आरोपी लोगों को भरोसा दिलाते थे कि कम समय में भारी मुनाफा मिलेगा, लेकिन निवेश के नाम पर जमा कराई गई रकम को अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
हाईटेक तरीके से चलता था फ्रॉड
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। इसमें अलग-अलग लोग अलग भूमिकाएं निभाते थे—कुछ लोग कॉलिंग और मैसेजिंग का काम करते थे, तो कुछ बैंक खातों और पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर करने का काम संभालते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी तकनीकी रूप से काफी सक्रिय थे और अपनी पहचान छुपाने के लिए कई लेयर में बैंकिंग ट्रांजैक्शन करते थे।
बरामदगी से खुला नेटवर्क का आकार
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 36 मोबाइल फोन और 53 एटीएम कार्ड के अलावा कई बैंक दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि गिरोह के पास बड़ी संख्या में फर्जी या म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था।
पुलिस अब इन बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
जांच जारी, बड़े खुलासों की उम्मीद
साइबर क्राइम यूनिट का कहना है कि यह एक अंतरराज्यीय और संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में इस गिरोह के और सदस्यों तथा वित्तीय नेटवर्क से जुड़े बड़े खुलासे होने की संभावना है।

