TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पार्टी के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम मिला है। इस गुट को चुनाव चिह्न के तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ दिया गया है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। चुनाव आयोग की यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
TMC के ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी का निशान
TMC के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को चुनाव आयोग ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया है। इसके साथ ही ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। इससे पहले ममता गुट ने आयोग को नए नाम और चुनाव चिह्न के कई विकल्प भेजे थे। इनमें फुटबॉल खिलाड़ी के अलावा क्रिकेट बैट का विकल्प भी शामिल था। आयोग ने अब फुटबॉल खिलाड़ी के चिह्न को मंजूरी दी है।
ऋतब्रत गुट को मिला लिफाफा
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े बागी खेमे को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम मिला है। इसके साथ चुनाव चिह्न के तौर पर ‘लिफाफा’ आवंटित किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस गुट ने चुनाव आयोग को ‘राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस’, ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ और ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ जैसे नामों के विकल्प दिए थे। चुनाव आयोग ने तीसरे विकल्प को मंजूरी दी।
पहले TMC का मूल नाम और सिंबल हुआ था फ्रीज
इस फैसले से एक दिन पहले यानी 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आयोग के सामने दोनों गुट पार्टी के संगठन और नेतृत्व पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में आगामी उपचुनावों में दोनों पक्ष एक ही नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरते, तो नामांकन प्रक्रिया में भी परेशानी पैदा हो सकती थी। इसी वजह से आयोग ने दोनों गुटों से तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न मांगे थे।
यह अंतिम फैसला नहीं है
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग का शुक्रवार का फैसला TMC के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला नहीं है। आयोग ने इसे अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू किया है। मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा, इस पर आयोग बाद में फैसला करेगा। फिलहाल दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न के साथ उपचुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है।

नंदीग्राम और रेजीनगर में होगा असर
चुनाव आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए लागू होगा। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी संबंधित उम्मीदवारों की पहचान नए नाम और चिह्न के आधार पर की जाएगी। आयोग ने रिटर्निंग अधिकारियों को नए आवंटित नाम और चुनाव चिह्न के अनुसार नामांकन की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
दोनों गुटों को तीन राज्यों में मान्यता
चुनाव आयोग के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर माना जाएगा।हालांकि, यह मान्यता भी मौजूदा चुनावी व्यवस्था और अंतरिम फैसले के संदर्भ में है। TMC के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मूल विवाद अभी आयोग के सामने लंबित है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल उपचुनावों के लिए TMC के दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे। ममता बनर्जी का गुट ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ेगा। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चिह्न मिला है। हालांकि, TMC के मूल नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। इसलिए मौजूदा व्यवस्था को फिलहाल स्थायी पार्टी पहचान नहीं माना जा सकता।
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Written by Ambar Pandey


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