ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत गुट ने EC को भेजे नाम, सभी में TMC का जिक्र; चुनाव आयोग ने फ्रीज किया नाम-चिह्न

ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत गुट ने EC को भेजे नाम, सभी में TMC का जिक्र; चुनाव आयोग ने फ्रीज किया नाम-चिह्न

ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत गुट ने EC को भेजे नाम, सभी में TMC का जिक्र। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने हैं। इस बीच ऋतब्रत गुट ने चुनाव आयोग के सामने नए नामों के विकल्प पेश किए हैं। खास बात यह है कि इन सभी प्रस्तावित नामों में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC का जिक्र रखा गया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नाम और चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया। आयोग ने दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा है।

ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत गुट ने EC को भेजे नाम

ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग को पार्टी के नए नामों के विकल्प भेजे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन नामों में तृणमूल कांग्रेस की पहचान को बनाए रखने की कोशिश की गई है। गुट का दावा है कि वही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है। इससे पहले 12 सितंबर को ऋतब्रत गुट के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की थी। बैठक में पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, संगठन और पार्टी फंड से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने इसे सकारात्मक बताया था और कहा था कि गुट ने आयोग के सवालों के जवाब दिए तथा जरूरी दस्तावेज जमा किए।

ममता बनर्जी गुट ने भी भेजी थी सूची

ऋतब्रत गुट से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी चुनाव आयोग को पार्टी के पदाधिकारियों और संगठन से जुड़ी सूची भेजी थी। ममता गुट का कहना है कि पार्टी का मौजूदा संगठन और नेतृत्व वैध है। वहीं, ऋतब्रत गुट ने संगठनात्मक चुनाव और पार्टी संविधान का हवाला देते हुए ममता के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में पेश कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और सिंबल?

चुनाव आयोग के सामने दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा किया है। ऐसे में आयोग ने अंतरिम तौर पर किसी एक गुट को मौजूदा नाम और चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। आयोग ने दोनों पक्षों को नए नाम चुनने और नए चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा है। अंतिम फैसला बाद में संगठनात्मक दावों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लिया जाएगा।

उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद

यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों से पहले सामने आया है। दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। 12 सितंबर की बैठक के दौरान भी दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी स्थिति चुनाव आयोग के सामने रखी थी। ममता गुट ने किसी भी अंतरिम आदेश पर आपत्ति जताई थी, जबकि ऋतब्रत गुट ने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश किए थे।

20 सांसदों के गुट से भी जुड़ा है विवाद

TMC का यह संगठनात्मक विवाद केवल ममता और ऋतब्रत गुट तक सीमित नहीं है। पार्टी से अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों का गुट नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI से जुड़ा है। इससे पार्टी की संगठनात्मक स्थिति और जटिल हो गई है। ममता गुट ने NCPI को लेकर भी चुनाव आयोग के सामने सवाल उठाए हैं। सितंबर में TMC नेता साकेत गोखले ने दावा किया था कि NCPI से जुड़े मामले में उनके RTI आवेदन का लंबे समय से जवाब नहीं मिला है। हालांकि, ये दावे संबंधित पक्षों के राजनीतिक बयान हैं।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल चुनाव आयोग ने TMC के पुराने नाम और चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज किया है। दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने होंगे। इसके बाद आयोग संगठन पर दावों से जुड़े दस्तावेजों और पक्षों की दलीलों पर आगे फैसला करेगा। यानी अभी यह तय नहीं हुआ है कि मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट को मिलेगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

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Written by Ambar Pandey

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