नई दिल्ली: दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने का फैसला किया है। यह कमेटी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की भी जांच करेगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि कमेटी में रिटायर्ड जज और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल होंगे।
कौन-कौन हो सकते हैं कमेटी में?
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, पूर्व हाईकोर्ट जज, पूर्व CBI निदेशक और पूर्व DGP शामिल होंगे। कोर्ट ने बताया कि एक पूर्व CBI निदेशक और एक पूर्व DGP की सहमति मिल चुकी है।
हालांकि, इन अधिकारियों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने अलग-अलग पक्षों से कमेटी के अन्य सदस्यों को लेकर सुझाव मांगे हैं। इसके बाद बुधवार को कमेटी के गठन का औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है।
किन मामलों की जांच करेगी कमेटी?
कमेटी का दायरा केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। यह 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं की भी जांच करेगी।
इसमें पुलिस पर लगाए गए कथित बल प्रयोग के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा।
इसके साथ ही कमेटी को प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो और CCTV फुटेज भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इन रिकॉर्डिंग के आधार पर घटनाक्रम की जांच की जाएगी।
20 जुलाई को क्या हुआ था?
दरअसल, परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। बाद में प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए।
वहीं दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने बचाव में कहा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे। पुलिस के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बल का इस्तेमाल किया गया।

छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर भी बड़ा संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर भी अहम संकेत दिया है। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के मामलों को गंभीर आपराधिक मामलों से अलग देखा जाना चाहिए।
अदालत ने राज्यों से ऐसी FIR की जानकारी मांगी है, जिनमें छात्रों पर गंभीर अपराध के आरोप नहीं हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में वहअनुच्छेद 14के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।
हालांकि, गंभीर अपराधों में शामिल लोगों या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को अलग नजर से देखा जाएगा। ऐसे मामलों में FIR खत्म करने की संभावना नहीं होगी।
‘छात्रों का भविष्य दांव पर है’
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों के भविष्य को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इन मामलों का असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कानून तोड़ने की अनुमति दी जा सकती है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को हाई-पावर्ड कमेटी के गठन को लेकर औपचारिक आदेश जारी कर सकता है। इसके बाद कमेटी के सदस्यों और उसके अधिकार क्षेत्र की तस्वीर साफ होगी।
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह कदम महत्वपूर्ण है। एक तरफ कोर्ट पुलिस कार्रवाई के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराना चाहता है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के भविष्य को लेकर भी अदालत ने नरम रुख के संकेत दिए हैं। अब सबकी नजर कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी।
`
Written by Ambar Pandey


One thought on “दिल्ली छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी हाई-पावर्ड कमेटी”