पीएम मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा को मुंबई के भयंदर में जमीन विवाद के मामले में बड़ी राहत मिली है। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने और निर्माण की अनुमति वापस करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम असगर अली की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद सामने आया है। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक को लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म हुई है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कंपनी की ओर से कब्जा छोड़ने की घोषणा को विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद असगर अली ने कहा था कि उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की सक्रियता बढ़ी। 16 सितंबर को इस मामले में प्रशासनिक सुनवाई भी तय की गई थी। इसी बीच, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने की घोषणा कर दी। कंपनी ने निर्माण की अनुमति वापस करने और असगर अली के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने की बात भी कही है। इससे कई वर्षों से चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है।
1989 में खरीदी थी 2,810 वर्ग मीटर जमीन
असगर अली वोरा मुंबई के मीरा रोड इलाके में रहते हैं। उनकी उम्र 81 साल है। वह गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ चुके हैं। असगर अली के मुताबिक, उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि वर्ष 2011 में इस जमीन पर कब्जा कर लिया गया। उन्होंने दावा किया कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर की गई और उनकी जानकारी के बिना संपत्ति को अलग-अलग हिस्सों में दिखाया गया। उनका आरोप था कि इस मामले में स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का नाम सामने आया। सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का संबंध बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से बताया गया है। हालांकि, जमीन विवाद से जुड़े आरोपों का अंतिम निर्णय अदालत और संबंधित जांच प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
15 साल से प्रशासन के चक्कर काट रहे थे असगर अली
असगर अली का कहना है कि वह लंबे समय से अपनी जमीन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व विभाग और पुलिस के पास शिकायत कर रहे थे। इस मामले में 2015 में FIR भी दर्ज हुई थी। इसके बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगने का फैसला किया। असगर अली ने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने इस विवाद की CBI जांच की मांग भी रखी।

बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने क्या फैसला लिया?
रिपोर्टों के मुताबिक, नरेंद्र मेहता से जुड़ी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने विवादित प्लॉट से अपना कब्जा हटाने का फैसला किया है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि वह इस जमीन पर मिली निर्माण अनुमति को वापस करेगी। इस फैसले के बाद असगर अली को जमीन का कब्जा वापस मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, जमीन के दस्तावेज, मालिकाना हक और पहले से दर्ज मुकदमे से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का निपटारा संबंधित अधिकारियों और अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।
क्या जमीन विवाद पूरी तरह खत्म हो गया?
फिलहाल इसे पूरी तरह खत्म हुआ विवाद नहीं कहा जा सकता। कब्जा छोड़ने का फैसला जरूर सामने आया है, लेकिन जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव, निर्माण अनुमति की वापसी और अदालत में लंबित मामले की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। असगर अली ने जमीन पर कब्जे और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी को लेकर शिकायत की थी। दूसरी ओर, कंपनी से जुड़े पक्ष का कहना है कि उसने जमीन वर्ष 2019 में खरीदी थी। इसलिए जमीन के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर सभी दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
पीएम मोदी के पुराने दोस्त कौन हैं, असगर अली?
असगर अली वोरा और नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। असगर अली अब मीरा रोड में रहते हैं। लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर मदद की अपील की। इस मुलाकात के बाद विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने का फैसला सामने आया है। इसी वजह से यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बन गया है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद असगर अली वोरा को जमीन विवाद में राहत मिली है। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी ने कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति वापस करने की घोषणा की है। अब आगे की प्रक्रिया में जमीन के रिकॉर्ड और लंबित कानूनी मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
Read More https://nationagenda.com/railway-7-high-density-network-modi-cabinet-ashwini-vaishnaw/
Written by Ambar Pandey

