इस्लामाबाद: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की मौजूदा व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और युवाओं की बढ़ती नाराजगी को लेकर बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में बोलते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि देश की शासन व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की अपेक्षाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे एकजुट होकर बड़े बदलाव की वजह बन सकते हैं।
आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का किया जिक्र
समिट के दौरान मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान इस समय महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, बेरोजगारी और हिंसा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उनके अनुसार, इन चुनौतियों का असर सबसे अधिक युवाओं पर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है और सरकार को युवाओं की उम्मीदों को गंभीरता से लेना होगा।
युवाओं को लेकर क्या बोले मोहसिन नकवी?
अपने संबोधन में नकवी ने कहा कि चाहे उन्हें युवा, ‘कॉकरोच’ या किसी भी नाम से पुकारा जाए, यदि वे एकजुट हो गए तो बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि युवा न्याय, योग्यता के आधार पर अवसर, रोजगार और सरकारी नौकरियों तक समान पहुंच चाहते हैं। उनके मुताबिक, सरकार अब तक इन अपेक्षाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकी है।
सरकार को दी सुधारों की सलाह
मोहसिन नकवी ने कहा कि युवाओं की मांगें बहुत जटिल नहीं हैं। उनका मुख्य उद्देश्य मेरिट के आधार पर नौकरी, बेहतर रोजगार के अवसर और पारदर्शी व्यवस्था है। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ काम करने की अपील की।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो युवाओं का असंतोष और बढ़ सकता है।
भारत के आंदोलन का किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान मोहसिन नकवी ने भारत में हुए कॉकरोच’ नाम से संदर्भित आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान को भी युवाओं के बढ़ते असंतोष को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो पाकिस्तान में भी व्यापक विरोध देखने को मिल सकता है।
हालांकि, उन्होंने किसी संभावित आंदोलन की घोषणा नहीं की, बल्कि इसे सरकार के लिए एक चेतावनी के रूप में पेश किया।
70 साल पुराने ढांचे में बदलाव की वकालत
गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। उनके अनुसार, दशकों पुराने ढांचे में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि शासन लोगों के अधिक करीब पहुंच सके।
उन्होंने नई प्रशासनिक यूनिट और नए प्रांत बनाए जाने के सुझाव का भी समर्थन किया। उनका तर्क था कि इससे प्रशासनिक सेवाएं और न्याय व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती हैं।

भारत का उदाहरण भी दिया
मोहसिन नकवी ने अपने संबोधन में भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि आजादी के समय वहां कम संख्या में प्रशासनिक इकाइयां थीं, जबकि समय के साथ उनमें विस्तार किया गया। उनके अनुसार, प्रशासन को लोगों के करीब लाने के लिए संरचनात्मक सुधार आवश्यक होते हैं।
राजनीतिक दलों और उद्योग जगत से अपील
नकवी ने राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर सुधारों पर आम सहमति बनाने की अपील की। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से भी कहा कि वे केवल चुनावी फंडिंग तक सीमित न रहें, बल्कि नीति निर्माण और सुधार प्रक्रिया में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल कड़ी मेहनत से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जब तक व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक स्थायी बदलाव लाना मुश्किल रहेगा।
Written by Ambar Pandey

