बच्चे के नैन-नक्श देख परिवार को हुआ शक
गुरुग्राम से सामने आए एक हैरान कर देने वाले मामले ने आईवीएफ प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दंपति ने लाखों रुपये खर्च कर आईवीएफ तकनीक के जरिए संतान प्राप्त की, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद उसके चेहरे-मोहरे और शारीरिक विशेषताएं परिवार से बिल्कुल अलग दिखाई दीं। शुरुआत में इसे सामान्य संयोग माना गया, लेकिन समय के साथ शक गहराता गया और आखिरकार परिवार ने डीएनए जांच कराने का फैसला किया।
DNA टेस्ट में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में पता चला कि बच्चा न तो जैविक रूप से मां से मेल खाता है और न ही पिता से। इस खुलासे के बाद दंपति ने पूरे मामले को गंभीर चिकित्सा लापरवाही और संभावित धोखाधड़ी बताते हुए संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
अस्पताल और IVF सेंटर पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार ने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट अथॉरिटी के साथ-साथ संबंधित अस्पताल और आईवीएफ सेंटर के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई, जिसके कारण किसी अन्य दंपति का एम्ब्रियो या प्रजनन सामग्री उनके मामले में इस्तेमाल हो गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गलती तकनीकी लापरवाही थी या प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई है।
कैसे होता है IVF में एम्ब्रियो मिक्स-अप का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार आईवीएफ प्रक्रिया में लैब के भीतर अंडाणु और शुक्राणु को मिलाकर एम्ब्रियो तैयार किया जाता है, जिसके बाद उसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस दौरान पहचान संबंधी त्रुटि, सैंपल लेबलिंग में गलती या लैब प्रबंधन की लापरवाही जैसी वजहों से एम्ब्रियो मिक्स-अप की आशंका पैदा हो सकती है। हालांकि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ माने जाते हैं, लेकिन गुरुग्राम का यह मामला एक बार फिर आईवीएफ क्लिनिकों में गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

