दिल्ली SIR में VIPs को क्यों आ रहे नोटिस? मनीष सिसोदिया को डेटा मिसमैच, जयशंकर को ‘अनमैप्ड’ अलर्ट…

दिल्ली SIR में VIPs को क्यों आ रहे नोटिस? मनीष सिसोदिया को डेटा मिसमैच, जयशंकर को 'अनमैप्ड' अलर्ट...

दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर इन दिनों काफी चर्चा है। इस प्रक्रिया के दौरान कई बड़े नेताओं, अधिकारियों, पूर्व न्यायाधीशों और उनके परिवार के सदस्यों को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

हालांकि, इन नोटिसों को लेकर एक जरूरी बात समझना जरूरी है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटना नहीं है। ये नोटिस मतदाता रिकॉर्ड में मिली तकनीकी गड़बड़ियों या पुराने रिकॉर्ड से मौजूदा रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने के मामलों में जारी किए गए हैं। संबंधित मतदाताओं को जरूरी दस्तावेज देकर अपना रिकॉर्ड सत्यापित कराने का मौका मिलेगा।

दिल्ली SIR जयशंकर को क्यों मिला ‘अनमैप्ड’ नोटिस?

दिल्ली SIR में एस. जयशंकर को अनमैप्ड का नोटिस मिला। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर का नाम ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगरी में आया है। इसका मतलब यह है कि उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को पिछली SIR की मतदाता सूची के संबंधित रिकॉर्ड से लिंक नहीं किया जा सका।

दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग इलाके में मतदाता के तौर पर दर्ज हैं। इसी तरह CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद और उनकी पत्नी समेत पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी के रिकॉर्ड को भी पिछली SIR से लिंक नहीं किया जा सका। यानी ‘अनमैप्ड ‘ का सीधा मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति मतदाता नहीं है। इसका संबंध मौजूदा रिकॉर्ड को पुराने SIR रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया से है।

एलके आडवाणी और परिवार को भी नोटिस

पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी के नाम भी ‘नो मैपिंग’ कैटेगरी में सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनके मौजूदा रिकॉर्ड को 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची से लिंक नहीं किया जा सका। दिलचस्प बात यह है कि आडवाणी के बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड मैपिंग प्रक्रिया में क्लियर हो गया है। इसके अलावा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ तथा बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज का नाम भी नोटिस पाने वालों में शामिल है।

मनीष सिसोदिया के परिवार में क्या गड़बड़ी मिली?

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार को भी SIR के तहत नोटिस मिला है। सिसोदिया के नोटिस में खास वजह स्पष्ट नहीं की गई है। वहीं उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के रिकॉर्ड में ‘सेल्फ नेम मिसमैचड’ दर्ज किया गया है। उनके बेटे मीर सिसोदिया के रिकॉर्ड में ‘पैरेंट नेम मिसमैच’ की समस्या बताई गई है। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड में व्यक्ति के अपने नाम या माता-पिता से जुड़े विवरण में अंतर पाया गया है। इसी तरह सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और उनके बेटे आनंद ब्रिटास के रिकॉर्ड में भी नाम से जुड़ी ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं।

SS संधू को भी मिला नोटिस, बाद में रिकॉर्ड वैलिडेट

भारत के चुनाव आयुक्त एसएस संधू का नाम भी नोटिस पाने वालों की सूची में सामने आया। उनके मामले में ‘सेल्फ नेम मिसमैच’ की जानकारी दी गई थी। हालांकि, नई दिल्ली जिला निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक संधू की चुनावी प्रविष्टि को सत्यापित कर लिया गया है और इसे अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए रखा गया है। यानी नोटिस जारी होने के बाद रिकॉर्ड का सत्यापन भी किया जा सकता है।

कितने मतदाताओं को नोटिस जारी हुए?

दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड को जांच के लिए चिह्नित किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 33.13 लाख मतदाता दो प्रमुख श्रेणियों में फ्लैग किए गए हैं। इनमें करीब 13.79 लाख मतदाता ‘नो मैपिंग’ और करीब 19.33 लाख मतदाता ‘तार्किक विसंगतियां’ की श्रेणी में हैं। दोनों को मिलाकर आंकड़ा करीब 33.13 लाख बैठता है। इनमें से 31 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इन मामलों में दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है।

‘नो मैपिंग’ और ‘डेटा मिसमैच’ का क्या मतलब है?

SIR में सामने आ रही दो प्रमुख श्रेणियों को आसान भाषा में समझें तो ‘नो मैपिंग’ का मतलब है कि मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR की मतदाता सूची के संबंधित रिकॉर्ड से लिंक नहीं किया जा सका। वहीं ‘सेल्फ नेम मिसमैच’ का मतलब है कि व्यक्ति के नाम से जुड़े रिकॉर्ड में अंतर है। ‘पैरेंट नेम मिसमैच’ में माता-पिता के नाम से संबंधित जानकारी में अंतर पाया गया है। इसके अलावा कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों की जानकारी या पुराने रिकॉर्ड में मौजूद विवरण से भी अंतर सामने आया है। इन विसंगतियों के आधार पर सिस्टम में रिकॉर्ड फ्लैग किए गए हैं।

क्या SIR नोटिस का मतलब वोट कटना है?

यह सबसे अहम सवाल है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल SIR नोटिस मिलने से किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटता।
जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में समस्या पाई गई है, उन्हें संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक किसी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया, सुनवाई का अवसर और अपील योग्य आदेश के हटाया नहीं जा सकता। इसलिए फिलहाल इन नोटिसों को रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब संबंधित मतदाताओं के दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच होगी। जिन मामलों में जानकारी सही पाई जाएगी, उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। वहीं जिन रिकॉर्ड में वास्तविक गड़बड़ी होगी, वहां निर्वाचन अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी की जानी है। इससे पहले SIR के तहत मिले नोटिसों पर सत्यापन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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Written by Ambar Pandey

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