क्या वैनडाइक पर आतंकी केस खत्म हो गया है?अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के मामले में NIA की चार्जशीट सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर यह चर्चा है कि जिस मामले में शुरुआत में UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था, उसकी चार्जशीट में अब UAPA की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।
NIA ने दिल्ली की विशेष अदालत में सातों विदेशी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें फिलहाल Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, NIA ने साफ किया है कि UAPA से जुड़े अपराधों की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। जरूरत पड़ने पर एजेंसी बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
क्या वैनडाइक पर आतंकी केस खत्म हो गया?
क्या वैनडाइक पर आतंकी केस खत्म हो गया है? तो इसका सीधा जवाब है- नहीं। चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि वैनडाइक और बाकी आरोपियों के खिलाफ UAPA जांच पूरी तरह खत्म कर दी गई है।
NIA के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी ने अदालत में बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। अगर आगे की जांच में UAPA के तहत अपराध से जुड़े पर्याप्त सबूत सामने आते हैं, तो एजेंसी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है। यानी फिलहाल अदालत में दाखिल चार्जशीट का मुख्य आधार विदेशी नागरिकों के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और सीमा पार करने से जुड़े कथित उल्लंघन हैं।
चार्जशीट में कौन-सी धाराएं लगाई गईं?
NIA ने सातों आरोपियों के खिलाफ Immigration and Foreigners Act की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये विदेशी नागरिक वैध वीज़ा के ज़रिए भारत आए थे। इसके बाद उन्होंने आवश्यक अनुमति के बिना मिजोरम के संरक्षित और प्रतिबंधित इलाकों में प्रवेश किया। आरोप है कि बाद में वे अवैध तरीके से म्यांमार की सीमा में भी चले गए। इसी गतिविधि को फिलहाल चार्जशीट में अभियोजन का प्रमुख आधार बनाया गया है।
कौन हैं सात आरोपी?
इस मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिक आरोपी बनाए गए हैं।
इन छह यूक्रेनी नागरिकों के नाम हैं – कामिंस्की विक्टर , हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास ,इवान सुकमानोव्स्की , स्टीफंकिव मैरियन ,होंचारुक मक्सिम।
NIA ने सभी को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था।

NIA ने क्या लगाए थे गंभीर आरोप?
इस मामले की शुरुआती जांच में NIA ने आरोप लगाया था कि आरोपी म्यांमार में सक्रिय जातीय हथियारबंद संगठनों और भारतीय विद्रोही समूहों से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थे। जांच एजेंसी का दावा था कि यूरोप से ड्रोन भारत के रास्ते म्यांमार तक पहुंचाए गए और वहां इन समूहों को ड्रोन तथा सैन्य गतिविधियों से जुड़ी ट्रेनिंग देने की कोशिश की गई। इन आरोपों की जांच के दौरान ही UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, मौजूदा चार्जशीट में इन आरोपों के आधार पर UAPA की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि NIA ने इन पहलुओं को जांच से बाहर कर दिया है।
फिर UAPA की धाराएं क्यों नहीं लगीं?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, NIA ने इस चरण में उन आरोपों को चार्जशीट का आधार बनाया है, जिनके संबंध में जांच एजेंसी के पास अभियोजन आगे बढ़ाने के लिए सामग्री उपलब्ध है। चार्जशीट में मुख्य आरोप प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश, अवैध आवाजाही और सीमा पार करने से जुड़े हैं। इसलिए Foreigners Act की धाराओं के तहत आरोप दाखिल किए गए हैं। वहीं, UAPA से जुड़े कथित अपराधों की जांच अभी जारी रखी गई है। आगे अगर जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो NIA अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
1 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने NIA की चार्जशीट पर विचार और संज्ञान लेने के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है। अब अदालत के सामने यह देखा जाएगा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर कानूनी तौर पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। वहीं, NIA की UAPA से जुड़ी जांच भी आगे जारी रहने वाली है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी
मैथ्यू वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों को NIA ने मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था। उस समय एजेंसी ने आरोप लगाया था कि आरोपी बिना जरूरी अनुमति के मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में पहुंचे और इसके बाद म्यांमार चले गए। शुरुआती FIR में UAPA की धाराएं शामिल थीं। बाद में दाखिल की गई चार्जशीट में फिलहाल Foreigners Act के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसलिए इस मामले में आगे की NIA जांच और संभावित सप्लीमेंट्री चार्जशीट बेहद महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल क्या समझें?
वैनडाइक केस में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UAPA की धाराएं मौजूदा चार्जशीट में नहीं हैं, लेकिन UAPA जांच बंद नहीं हुई है। इसलिए इसे अभी आरोपों से पूरी तरह बरी होना या आतंकी केस का खत्म होना नहीं माना जा सकता। आगे की जांच में अगर NIA को UAPA के तहत अपराध से जुड़े सबूत मिलते हैं, तो एजेंसी सप्लीमेंट्री चार्जशीट के जरिए उन आरोपों को अदालत के सामने रख सकती है।
Wrritten by Ambar Pandey

