परिसीमन पर अमित शाह के सामने डीके शिवकुमार की बड़ी मांग, बोले- 543 लोकसभा सीटें 25 साल तक रहें; CM विजय ने भी उठाई आवाज

परिसीमन पर अमित शाह के सामने डीके शिवकुमार की बड़ी मांग, बोले- 543 लोकसभा सीटें 25 साल तक रहें; CM विजय ने भी उठाई आवाज

नई दिल्ली: परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों की चिंता एक बार फिर सामने आई है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने परिसीमन को लेकर बड़ी मांग रखी। उन्होंने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग की।

बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। विजय ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद संसद में अपनी मौजूदा राजनीतिक हिस्सेदारी गंवानी नहीं चाहिए।

परिसीमन पर डीके शिवकुमार ने अमित शाह के सामने क्या मांग रखी?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने की मांग की। इसमें 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने की बात कही गई है।

उन्होंने यह भी मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाए। शिवकुमार के मुताबिक, महिलाओं के लिए आरक्षण भी इन्हीं 543 सीटों के भीतर लागू किया जाना चाहिए।

शिवकुमार ने तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में उनकी सफलता का असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नहीं पड़ना चाहिए।

CM विजय ने परिसीमन को लेकर क्या कहा?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने भी परिसीमन के संभावित प्रभावों पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट संवैधानिक या विधायी सुरक्षा देने की मांग की।

विजय का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें लोकसभा में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी के प्रतिशत में कमी का नुकसान नहीं उठाना चाहिए। हालांकि, इस बैठक में विजय ने लोकसभा की 543 सीटों को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग नहीं की।

इससे पहले विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा की 543 सीटों की संख्या स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग कर चुके हैं।

आखिर परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों को डर क्यों है?

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का नए सिरे से निर्धारण करना है। इसमें जनसंख्या एक महत्वपूर्ण आधार होती है।

दक्षिणी राज्यों की चिंता यह है कि उन्होंने पिछले दशकों में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है। वहीं, कुछ उत्तरी राज्यों की आबादी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अगर भविष्य का परिसीमन मुख्य रूप से मौजूदा जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो दक्षिणी राज्यों की तुलना में उत्तर भारत की लोकसभा सीटों में ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि इससे उनकी संसद में राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है।

डीके शिवकुमार ने वित्तीय हिस्सेदारी का भी मुद्दा उठाया

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में डीके शिवकुमार ने केवल परिसीमन का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने कर्नाटक की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की भी मांग की।

उन्होंने केंद्र के विभाज्य कर पूल में कर्नाटक की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत करने की मांग रखी। इसके अलावा उन्होंने राज्य के लिए विशेष अनुदान और अलग-अलग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में केंद्र से सहयोग मांगा।

कावेरी और मेकेदाटु का मुद्दा भी उठा

बैठक में कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद का मुद्दा भी चर्चा में रहा। डीके शिवकुमार ने जल विवादों को लेकर सहयोग और पारदर्शिता की जरूरत बताई।

उन्होंने मेकेदाटु परियोजना को भी महत्वपूर्ण बताया। शिवकुमार के मुताबिक, इस परियोजना से केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों को भी फायदा हो सकता है।

अमित शाह की बैठक में और कौन से मुद्दे उठे?

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में परिसीमन और जल विवाद के अलावा NEET, शिक्षा, वित्तीय हिस्सेदारी, किसानों, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

दक्षिणी राज्यों ने केंद्र से क्षेत्र के आर्थिक योगदान के अनुरूप वित्तीय संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित संतुलन की मांग की।

अमित शाह के सामने दक्षिण का साझा संदेश

अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दक्षिणी राज्यों की ओर से एक साझा चिंता सामने आई। राज्यों का कहना है कि आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नहीं पड़ना चाहिए।

परिसीमन के मुद्दे पर डीके शिवकुमार ने 543 लोकसभा सीटों को 25 साल तक बनाए रखने का प्रस्ताव रखा। वहीं, CM विजय ने दक्षिणी राज्यों की मौजूदा राजनीतिक हिस्सेदारी की सुरक्षा के लिए स्पष्ट आश्वासन मांगा।

परिसीमन पर आगे क्या होगा?

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच आने वाले समय में बातचीत और तेज हो सकती है। फिलहाल दक्षिणी राज्यों की मुख्य मांग यह है कि जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता को राजनीतिक नुकसान का कारण न बनाया जाए।

वहीं, डीके शिवकुमार की 543 लोकसभा सीटों को 25 साल तक बरकरार रखने की मांग ने इस बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर आगे क्या रुख अपनाती है।

कुल मिलाकर, अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में परिसीमन सबसे अहम राजनीतिक मुद्दों में रहा। डीके शिवकुमार ने 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखने और लोकसभा की 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग की।

दूसरी ओर, CM विजय ने दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा के लिए स्पष्ट आश्वासन की मांग की। इसके साथ ही कावेरी, मेकेदाटु, वित्तीय हिस्सेदारी और विकास से जुड़े मुद्दे भी बैठक में उठे।

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Written by Ambar Pandey

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