क्या विदेशी पिचों पर कमजोर पड़ रही है टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी ? ट्रेंट ब्रिज की हार के बाद फिर उठे सवाल

क्या विदेशी पिचों पर कमजोर पड़ रही है टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी

नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम की बल्लेबाज़ी पूरी तरह लड़खड़ा गई। 202 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम 76 रन पर सिमट गई। इस बड़ी हार के बाद भारतीय बल्लेबाज़ों की विदेशी परिस्थितियों में प्रदर्शन क्षमता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों का एक वर्ग लंबे समय से यह सवाल उठाता रहा है कि क्या भारतीय बल्लेबाज़ घरेलू और आईपीएल की बल्लेबाज़ी के अनुकूल पिचों पर तो सफल रहते हैं, लेकिन स्विंग और सीम वाली विदेशी पिचों पर उनकी तकनीक उतनी प्रभावी नहीं रहती। ट्रेंट ब्रिज में मिली हार के बाद यह चर्चा फिर सुर्खियों में है।

क्या आईपीएल की बल्लेबाज़ी शैली का पड़ रहा है असर?

आईपीएल ने भारतीय क्रिकेट को कई प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ दिए हैं। हालांकि कुछ क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हाई-स्कोरिंग मैच और बल्लेबाज़ी के अनुकूल विकेट खिलाड़ियों की सोच को अधिक आक्रामक बना देते हैं।

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी परिस्थितियों में गेंदबाज़ों को अतिरिक्त स्विंग, सीम मूवमेंट और उछाल मिलती है। ऐसे में बल्लेबाज़ों को अपनी तकनीक और शॉट चयन में बदलाव करना पड़ता है। ट्रेंट ब्रिज में भारतीय बल्लेबाज़ शुरुआती ओवरों में इसी चुनौती से जूझते दिखाई दिए।

आक्रामक क्रिकेट की रणनीति पर भी उठे सवाल

मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में भारतीय टी20 टीम लगातार आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश कर रही है। शुरुआती ओवरों में तेज रन बनाने की यह रणनीति कई मौकों पर सफल भी रही है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर परिस्थिति में एक जैसी बल्लेबाज़ी रणनीति कारगर नहीं होती। यदि पिच गेंदबाज़ों की मदद कर रही हो, तो बल्लेबाज़ों को शुरुआत में संयम दिखाकर परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। ट्रेंट ब्रिज में भारत का शीर्ष क्रम ऐसा करने में सफल नहीं दिखा।

क्या ‘फ्लैट ट्रैक बुली’ कहना उचित है ?

सोशल मीडिया पर हार के बाद भारतीय बल्लेबाज़ों को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने टीम को ‘फ्लैट ट्रैक बुली’ तक कहा। हालांकि केवल एक या दो मुकाबलों के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।

भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है। अनुभवी खिलाड़ियों के बाद कई युवा बल्लेबाज़ पहली बार इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। ऐसे में अनुभव की कमी भी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा टी20 क्रिकेट में बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय जोखिम लेना मजबूरी भी बन जाता है। शुरुआती विकेट गिरने के बाद बल्लेबाज़ों पर दबाव और बढ़ जाता है, जिसका असर पूरी पारी पर दिखाई देता है।

आगे की चुनौती

भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह साबित करना होगी कि ट्रेंट ब्रिज की हार केवल एक खराब दिन का परिणाम थी, न कि विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाज़ी की स्थायी कमजोरी।

सीरीज के बाकी मुकाबले भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए परीक्षा होंगे। यदि टीम कठिन परिस्थितियों में बेहतर तकनीक, धैर्य और मैच के अनुसार बल्लेबाज़ी करती है, तो आलोचनाओं का जवाब मैदान पर ही मिल जाएगा। लेकिन अगर विदेशी पिचों पर इसी तरह का प्रदर्शन जारी रहता है, तो भारतीय बल्लेबाज़ी के मौजूदा दृष्टिकोण और तैयारी पर गंभीर सवाल उठना तय है।

फिलहाल इतना साफ है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में केवल आक्रामक बल्लेबाज़ी ही सफलता की गारंटी नहीं है। विदेशी परिस्थितियों में तकनीकी दक्षता, धैर्य और परिस्थितियों के अनुरूप खेलना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना तेज़ रन बनाना।

read more https://nationagenda.com/sps-new-move-for-the-brahmin-vote-bank-in-up-pawan-and-sanatan-pandey-entrusted-with-major-responsibilitieswill-akhileshs-strategy-succeed/

written by Neeraj Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *